
शहनाई की मधुर धुनों ने
बांधा समां
संस्था कृपालु के पंडाल में
प्रतिदिन भोजन प्रसादी
ग्रहण कर रहे हजारों भक्त
देवास। चामुंडा कॉम्प्लेक्स परिसर में चल रहे संस्था कृपालु परिवार के गणेश उत्सव का दूसरा दिन गुरुवार को विशेष रहा। इस दिन देशभक्ति और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिला। आयोजन समिति ने सीमा पर रहकर देश की रक्षा करने वाले पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया। सैनिकों के सम्मान के साथ ही विलुप्त हो रही शहनाई कला को भी संबल देने का प्रयास किया गया।
संस्था की ओर से सुमेर सिंह दरबार ने कर्नल, ब्रिगेडियर, कमांडर सहित सेवानिवृत्त सैनिकों को दुपट्टा और प्रतीक चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया। जैसे ही सैनिक मंच पर पहुंचे, श्रद्धालुओं ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। सैनिकों ने मंच पर सामूहिक रूप से कृपालु के बप्पा की आरती उतारी। इस दौरान “गणपति बप्पा मोरया”, “कृपालु के बप्पा मोरया” और “भारत माता की जय” के नारे गूंजते रहे। पूरा माहौल श्रद्धा और देशभक्ति से भर गया।
सम्मानित किए गए सैनिकों ने संस्था की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों को राष्ट्रभक्ति से जोड़ना समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि इससे नई पीढ़ी को यह संदेश मिलता है कि धर्म और देशप्रेम साथ-साथ चल सकते हैं। सैनिकों ने विशेष रूप से संस्था कृपालु परिवार की भोजन प्रसादी परंपरा की प्रशंसा की और कहा कि भोजन सेवा ही सबसे बड़ी नारायण सेवा है।
आयोजन के दौरान शहनाई वादकों को भी सम्मानित किया गया। संस्था ने उन कलाकारों को आगे लाकर समाज के सामने प्रस्तुत किया, जिनकी कला धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। जैसे ही शहनाई की मधुर धुनें वातावरण में गूंजीं, श्रद्धालुओं ने लंबे समय बाद इस वाद्ययंत्र का आनंद लिया। आयोजकों ने कहा कि शहनाई भारतीय संस्कृति और परंपरा की आत्मा है और इसे जीवित रखना समाज की जिम्मेदारी है।
आरती के पश्चात भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की और स्वयं को धन्य माना। कृपालु के बप्पा का परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। हर वर्ग के लोग — बच्चे, युवा और बुजुर्ग उत्साह के साथ पहुंचे। पूरे परिसर को रोशनी और पुष्प सज्जा से आकर्षक रूप दिया गया था। सैनिकों और शहनाई वादकों का स्वागत होते ही उपस्थित जनसमूह ने खड़े होकर तालियां बजाईं और इस क्षण को यादगार बना दिया।
संस्था कृपालु परिवार ने देवासवासियों से अपील की है कि वे प्रतिदिन होने वाली आरती, भजन और प्रसादी में शामिल होकर इस पुण्य कार्य के सहभागी बनें।





