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आवासीय भूखंड पर शेड बनाकर किराये पर चढ़ा दी दुकानें

सिविल लाइंस क्षेत्र में किया

जा रहा अतिक्रमण, देखने

वाला कोई नहीं



देवास। शहर का एक ऐसा क्षेत्र जहां अधिकारियों से लेकर उद्योगपति व बड़े-बड़े व्यापारी निवास करते हैं, यहां मार्ग तो चौड़ा हो गया, लेकिन अब इस मार्ग को आवासीय भूखंड वाले बिना किसी अनुमति के व्यावासयिक उपयोग का बना रहे हैं। हम बात कर रहे हैं, शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र की जहां इंदिरा गांधी प्रतिमा चौराहे से लेकर ब्रिज तक मार्ग के दोनों ओर आवासीय भूखंड पर शेड बनाकर उसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। विनायक अस्पताल के सामने वलो क्षेत्र में पुराने प्राधिकरण के भवन बने हुए हैं, जिसमें सड़क की ओर शेड बनाकर दुकानें निकाल दी गई हैं और इन दुकानों को किराये पर चढ़ा दिया गया है। इन भवन स्वामियों को तो प्रतिमाह मोटा किराया प्राप्त हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम को राजस्व की हानि हो रही है। शहर के इस व्यस्ततम मुख्य मार्ग पर एक आम नागरिक को तो यह सब नजर आ रहा है, लेकिन नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों व इंजीनियरों को यह सब नजर नहीं आ रहा। नगर निगम के संपत्तिकर विभाग द्वारा आवासीय व व्यवसायिक कर अलग-अलग वसूला जाता है, लेकिन जहां पर आवासीय क्षेत्र में दुकानें बनाकर व्यवसायिक उपयोग हो रहा है, वहां अभी तक निगम की टीम नहीं पहुंची है। ऐसे में इस मार्ग पर मनमानी का आलम है और कोई अपने मकान के सामने पतरे के शेड वाली दुकान बनाकर या तो स्वयं दुकान संचालित कर रहा है या फिर किराये पर देकर मोटी रकम वसूल रहे हैं। स्थिति यह है कि ऐसी छोटी-छोटी दुकानें भी 25 से 40 हजार रुपए प्रतिमाह के हिसाब से दी जा रही हैं। इसके अलावा तीन माह का एडवांस भी लिए जाने की बात सामने आ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सबकुछ खुलेआम हो रहा है और अभी तक ना तो नगर निगम की ओर से इन भवन स्वामियों को कोई सूचना पत्र दिया गया है और ना ही कोई कार्रवाई देखने को मिल रही है। अब देखना यह है कि नगर निगम इस संबंध में कोई कार्रवाई करता है या फिर यह सबकुछ यूं ही चलता रहेगा।
घरेलू बिजली से ही व्यावसायिक उपयोग
नियमानुसार मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी द्वारा घरेलू उपयोग तथा व्यावसायिक उपयोग के लिए अलग-अलग मीटर लगाए जाते हैं, जिनका प्रति यूनिट शुल्क भी अलग-अलग होता है। लेकिन आवासीय भूखंड पर बने टीनशेड की दुकानों में घरेलू मीटर से ही व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। नगर निगम ही नहीं, विद्युत वितरण कंपनी को भी इससे नुकसान हो रहा है। वैसे तो विद्युत वितरण कंपनी कॉलोनियों में पैनी नजर रखती है और विद्युत बिल की वसूली भी तत्परता से की जाती है। विद्युत वितरण कंपनी का भी ध्यान इस क्षेत्र में नहीं है, जबकि इस क्षेत्र में बड़े-बड़े अधिकारी, उद्योगपति व व्यापारी निवास करते हैं।


आपने यह जो मामला मेरे संज्ञान में लाया है, इसको मैं नगर निगम के रिकॉर्ड में दिखाती हूं यदि आवास की दुकान पर कोई व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।


देवबाला पीपलोनिया
उपायुक्त नगर निगम देवास

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