
मामला आवासीय भूखंड
पर टीन शेड की दुकानें
बनाकर व्यावसायिक
उपयोग करने का
देवास। शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र में प्राधिकरण के बने भवनों के सामने मुख्य मार्ग पर एमओएस पर भूखंड स्वामियों द्वारा अवैध निर्माण करते हुए टीन शेड की दुकानें बनाकर व्यावसायिक उपयोग की दुकानें किराये पर चढ़ा दी गई थी। इस मामले को लेकर निगम उपायुक्त देवबाला पिपलोनिया ने मामले को संज्ञान में लिया और क्षेत्रीय इंजीनियर विजय जाधव को उक्त क्षेत्र में सर्वे कर रिपोर्ट प्रेषित करने के लिए निर्देशित किया। क्षेत्रीय इंजीनियर जाधव ने इस मामले में सर्वे कर अपनी रिपोर्ट नगर निगम उपायुक्त पिपलोनिया को सौंपी, जिसमें यह उल्लेख किया गया कि आवासीय भूखंड पर अवैध निर्माण कर भूखंड स्वामियों द्वारा व्यावसायिक उपयोग हेतु दुकानें किराये पर चढ़ा दी गई हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद नगर निगम ने इस मामले में भूखंड स्वामियों को सूचना पत्र जारी किए हैं और इस सूचना पत्र में एक सप्ताह में अवैध निर्माण स्वयं हटाकर लिखित जानकारी नगर निगम को प्रेषित करने को कहा है। साथ ही यह भी उल्लेख किया है कि यदि सात दिवस के अंदर अवैध निर्माण नहीं हटाया गया तो नगर निगम की टीम अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई करेगीतथ इसका पूरा खर्चा वसुला जाएगा। सूचना पत्र मिलने के बाद भूखंड स्वामियों में हड़कंप मच गया है और वे सभी तरह तरह के जतन करने में जुट गए हैं। नगर निगम के अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन बात नहीं बन पा रही है। अब उन्हें बुलडोजर की कार्रवाई का डर सताने लगा है। कारण यह है कि इन अवैध निर्माणों के चलते वे दुकानें किराये पर चढ़ाकर प्रतिमाह मोटी रकम वसूला करते थे। अब उन्हें प्रतिमाह 20 से 25 हजार रुपए का नुकसान नजर आने लगा है। वहीं अवैध निर्माण टूटने से होने वाले नुकसान का भी भय सता रहा है। उल्लेखनीय है कि लंबे समय से सिविल लाइंस क्षेत्र में ऐसी दुकानें संचालित हो रही हैं, जिसकी ओर किसी का भी ध्यान नहीं जा रहा था। जबकि इस क्षेत्र में अधिकतर प्रशासनिक अधिकारियों के निवासी हैं और उनका अक्सर इस मार्ग से आना-जाना लगा रहता है। बावजूद इसके यह दुकानें बिना किसी डर के संचलित हो रही थीं। कहीं न कहीं इसमें मिलीभगत की बू भी आने लगी थी। लेकिन अब इस मामले को उजागर होने के बाद नगर निगम को इस ओर ध्यान देना पड़ा और अब सूचना पत्र जारी किए गए हैं। पिछले कुछ समय से नगर निगम का अमला एमजी रोड पर अतिक्रमण हटाने में लगा हुआ था। अब वहां विकास कार्य की शुरुआत हो चुकी है। अब लगता है, एक सप्ताह में नगर निगम का यह अमला सिविल लाइंस क्षेत्र का रुख करेगा। ताकि इन अवैध निर्माणों को तोड़ा जा सके। चौंकाने वाली बात तो यह भी है कि सिविल लाइंस क्षेत्र में ही कुछ प्रायवेट नर्सिंग होम भी संचालित हो रहे हैं, जिनके पिछले हिस्से के भवन आवासीय क्षेत्र में निर्मित हैं, लेकिन इन भवनों के कमरे भी मरीजों को भर्ती करने के लिए व्यावसायिक उपयोग में लिए जा रहे हैं। अभी तो नगर निगम ने अवैध निर्माण की दुकानों को ही सूचना पत्र जारी किए हैंं। निकट भविष्य में इन नर्सिंग होम संचालकों की बारी भी आ सकती है। यदि ऐसा हुआ तो नगर निगम को न सिर्फ राजस्व की बढ़ोतरी होगी, बल्कि अवैध निर्माण पर भी अंकुश लगेगा। अब देखना यह है कि नगर निगम सूचना पत्र में दी गई अवधि के बाद क्या कार्रवाई करता है।




